Saturday, June 6, 2026
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: 2 साल 9 महीने तक क्या- क्या हुआ

देहरादून: Ankita Bhandari Murder Case. दो साल 9 महीने के इंतजार के बाद आखिरकार अंकिता भंडारी के लिए न्याय का दिन आ गया। पौड़ी जिले की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या के मामले में आज कोटद्वार कोर्ट ने तीनों आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए तीनों को सात साल कैद की सजा सुना दी। पर 2 साल और 9 महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान क्या क्या हुआ आइए जानते हैं।

कौन थी अंकिता भंडारी,

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीकोट गांव की रहने वाली थीं। वह अपने स्कूल बीआर मार्डन, पौड़ी की 12वीं की टॉपर थीं और उन्हें बिजनेस विषय में ‘बेस्ट स्टूडेंट’ का अवार्ड भी मिला था। अंकिता का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उनके पिता वीरेंद्र भंडारी पहले मजदूरी करते थे, लेकिन उम्र बढ़ने के कारण उन्होंने काम छोड़ दिया। उनकी मां सोनी देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और बड़े भाई सचिन दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था। किसी तरह मां ने अंकिता को देहरादून से होटल मैनेजमेंट का एक साल कोर्स करवाया था। अंकिता पढ़ाई में बेहद अनुशासित और मेहनती छात्रा थीं।  घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अंकिता ने नौकरी करने का निर्णय लिया। अंकिता ने 28 अगस्त 2022 को ऋषिकेश के पास यमकेश्वर के गंगा भोगपुर स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की। पहली तनख्वाह 10 हजार रूपए तय हुई थी। आंखों में कई संजो कर बैठी अंकिता के लिए यह एक अच्छी शुरूआत थी। Ankita Bhandari Murder Case

अंकिता की हत्या कैसे हुई 

नौकरी शुरू करने के 10 दिन बाद ही यानी 18 सितंबर 2022 को अचानक अंकिता लापता हो गई। 23 सितंबर को उनकी लाश चिला नहर से बरामद हुआ। यह नहर उस रिजॉर्ट के पास ही थी, जहां अंकिता नौकरी कर रही थी। जिसके बाद अंकिता की हत्या की खबर ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया। उसके परिवार में कोहराम मच गया। शुरूआत से ही यह पूरा मामला राजनीतिक रंग लेने लगा था।  रिजॉर्ट का मालिक भाजपा का पदाधिकारी रह चुका था। जिस कारण लक्ष्मणझूला पुलिस ने पहले तो इस मामले में मुकदमा तक दर्ज नहीं किया। इसके बाद जनाक्रोश बढ़ता और अंकिता हत्याकांड को लेकर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन होने लगे। जिसके बाद राज्य की भाजपा सरकार भी दबाव में आई और आखिरकार मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पर इस पूरे प्रकरण में सरकार की भूमिका बेहद संवेदनशील रही। अंकिता भंडारी हत्याकांड के गवाह ने बताया था कि रिजॉर्ट में अंकिता को एक वीआईपी मेहमान को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया जा रहा था। पुलिस आज तक उस वीआईपी का पता नहीं लगा पाई। इसके अलावा जिस रिजॉर्ट में अंकिता की हत्या हुई उस पर बुल्डोजर चला दिया गया। यह किसके कहने पर और क्यों हुआ इसको लेकर भी कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है। 

भाजपा के नेताओं पर आरोप लगे

मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के पिता विनोद आर्य और भाई अंकित आर्य, भाजपा से जुड़े थे।  अंकित आर्य को उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष पद पर तैनात था। यही कारण रहा कि पुलिस शुरूआत में मामले को दबाती नजर आई। पर बाद में जनदबाव में अंकित आर्य को भाजपा ने अन्य पिछड़ा वर्ग उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया। उसके पिता को भी भाजपा से निष्कासित कर दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाद में रेगुलर पुलिस से यह मामला एसआईटी को सौंप दिया। पर एसआईटी की भूमिका पर भी कई बार लोगों ने सवाल उठाए। 

पुलिस जांच में क्या मिला?

पुलिस जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो कि उत्तराखंड के पूर्व मंत्री विनोद आर्य के बेटे हैं, ने अंकिता पर रिजॉर्ट के ग्राहकों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव डाला था। आरोप है कि अंकिता के इनकार करने पर पुलकित और उसके दो सहयोगियों—सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—ने उसे नहर में धक्का देकर मार डाला। पुलिस ने 500 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट के सामने दाखिल की है। इस मामले में 97 गवाहों की गवाही के बाद, 30 मई 2025 को कोटद्वार की एडीजे कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने माना कि यह हत्या पूर्व नियोजित थी और अंकिता पर अनैतिक कार्यों का दबाव डाला गया था।

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की राजनीति, समाज और न्याय प्रणाली को झकझोर दिया। इस मामले ने सत्ता के दुरुपयोग, महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। अब जबकि अदालत ने दोषियों को दोषी ठहराया है, उम्मीद है कि यह मामला समाज में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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